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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4241

नंबर 4241किताब 37, नंबर 2
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الْحَفَرِيُّ، عَنْ بَدْرِ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ عَامِرٍ، عَنْ رَجُلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَكُونُ فِي هَذِهِ الأُمَّةِ أَرْبَعُ فِتَنٍ فِي آخِرِهَا الْفَنَاءُ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Mas'ud: The Prophet (ﷺ) said: four (majestic) trials (fitnahs) will take place among this community, and in their end there will be destruction
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Trials and Fierce Battles (Kitab Al-Fitan Wa Al-Malahim)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।