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सुनन अबू दाऊद

नंबर 4110

नंबर 4110किताब 34, नंबर 91
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا عُمَرُ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، فِي هَذِهِ الْقِصَّةِ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّهُ إِذًا يَمُوتُ مِنَ الْجُوعِ فَأَذِنَ لَهُ أَنْ يَدْخُلَ فِي كُلِّ جُمُعَةٍ مَرَّتَيْنِ فَيَسْأَلَ ثُمَّ يَرْجِعَ ‏.‏
The tradition mentioned above has also been transmitted by al-Auza'i through a different chain of narrators. This version adds:He was told: Messenger of Allah, in that case he will of starvation. So he allowed him to visit (the cit) twice a week so that he might ask for food and go back
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Clothing (Kitab Al-Libas)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।