حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَؤُهَا { فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ } يَعْنِي مُثَقَّلاً . قَالَ أَبُو دَاوُدَ مَضْمُومَةَ الْمِيمِ مَفْتُوحَةَ الدَّالِ مَكْسُورَةَ الْكَافِ .
Narrated Abdullah ibn Mas'ud: The Prophet (ﷺ) used to read the verse "Is there any that will receive admonition (muddakir)? " that is with doubling of consonant [(dal)(d)]. Abu Dawud said: The word muddakir may be pronounced as mim (m) with a short vowel u. (dal)(d) with a short vowel and kaf (k) with a short vowel i
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।