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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3973

नंबर 3973किताब 32, नंबर 5
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمٍ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ كَثِيرٍ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ لَقِيطِ بْنِ صَبِرَةَ، عَنْ أَبِيهِ، لَقِيطِ بْنِ صَبِرَةَ قَالَ كُنْتُ وَافِدَ بَنِي الْمُنْتَفِقِ - أَوْ فِي وَفْدِ بَنِي الْمُنْتَفِقِ - إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ الْحَدِيثَ فَقَالَ - يَعْنِي النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم - ‏ "‏ لاَ تَحْسِبَنَّ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ لاَ تَحْسَبَنَّ ‏.‏
Narrated Laqit ibn Sabirah: I came in the deputation of Banu al-Muntafiq to the Messenger of Allah (ﷺ). He then narrated the rest of the tradition. The Prophet (ﷺ) said: la tahsibanna (do not think) and did not say: la tahsabanna (do not think)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · Dialects and Readings of the Qur'an (Kitab Al-Huruf Wa Al-Qira'at)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।