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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3966

नंबर 3966किताब 31, नंबर 41
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ نَجْدَةَ، حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنِي سُلَيْمُ بْنُ عَامِرٍ، عَنْ شُرَحْبِيلَ بْنِ السِّمْطِ، أَنَّهُ قَالَ لِعَمْرِو بْنِ عَبَسَةَ حَدِّثْنَا حَدِيثًا، سَمِعْتَهُ مِنْ، رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ رَقَبَةً مُؤْمِنَةً كَانَتْ فِدَاءَهُ مِنَ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
Amr ibn Abasah, said that Marrah ibn Ka'b said:I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: If anyone emancipates a Muslim slave, that will be his ransom from Jahannam
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।