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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3963

नंबर 3963किताब 31, नंबर 38
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَلَدُ الزِّنَا شَرُّ الثَّلاَثَةِ ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ لأَنْ أُمَتِّعَ بِسَوْطٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ أَحَبُّ إِلَىَّ مِنْ أَنْ أَعْتِقَ وَلَدَ زِنْيَةٍ ‏.‏
Narrated AbuHurayrah: The Prophet (ﷺ) said: The child of adultery is worst of the three. Abu Hurairah said: That I give a flog in the path of Allah (as a charity) is dearer to me than emancipating a child of adultery
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।