सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन अबू दाऊद

नंबर 3961

नंबर 3961किताब 31, नंबर 36
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عَتِيقٍ، وَأَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، أَنَّ رَجُلاً، أَعْتَقَ سِتَّةَ أَعْبُدٍ عِنْدَ مَوْتِهِ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ مَالٌ غَيْرُهُمْ فَبَلَغَ ذَلِكَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَأَقْرَعَ بَيْنَهُمْ فَأَعْتَقَ اثْنَيْنِ وَأَرَقَّ أَرْبَعَةً ‏.‏
Imran b. Husain said:A man emancipated six slaved at the time of his death and he had no other property. The Prophet (ﷺ) was informed about it. He cast lots among them, emancipated two and retained four in slavery
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad Sahih Sahih Muslim (1668)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।