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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3959

नंबर 3959किताब 31, नंबर 34
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، - يَعْنِي ابْنَ الْمُخْتَارِ - حَدَّثَنَا خَالِدٌ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، بِإِسْنَادِهِ وَمَعْنَاهُ وَلَمْ يَقُلْ فَقَالَ لَهُ قَوْلاً شَدِيدًا ‏.‏
The tradition mentioned above has also been transmitted by Abu Qilabah through a different chain of narrators on the authority of 'Imran b. Husain to the same effect. But in this version he did not mention "He spoke severely of them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।