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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3956

नंबर 3956किताब 31, नंबर 31
حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ مُسَافِرٍ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ بَكْرٍ، أَخْبَرَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي عَطَاءُ بْنُ أَبِي رَبَاحٍ، حَدَّثَنِي جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، بِهَذَا زَادَ وَقَالَ - يَعْنِي النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم - ‏ "‏ أَنْتَ أَحَقُّ بِثَمَنِهِ وَاللَّهُ أَغْنَى عَنْهُ ‏"‏ ‏.‏
The tradition mentioned above also has been transmitted by Jabir b. 'Abd Allah through a different chain of narrators. This version added:The Prophet (ﷺ) said: You are more entitled to his price, and Allah has no need of it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih HadithAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।