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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3935

नंबर 3935किताब 31, नंबर 10
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، ح وَحَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ سُوَيْدٍ، حَدَّثَنَا رَوْحٌ، قَالاَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، بِإِسْنَادِهِ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ مَمْلُوكًا بَيْنَهُ وَبَيْنَ آخَرَ فَعَلَيْهِ خَلاَصُهُ ‏"‏ ‏.‏ وَهَذَا لَفْظُ ابْنِ سُوَيْدٍ ‏.‏
Qatadah narrated with his chain of narrators:The Prophet (ﷺ) said: If a man emancipates a slave shared by him with another man, his emancipation rests with him (who emancipated his share). This is the version of Ibn Suwaid
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (1502)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।