حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بُوذَوَيْهِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ مَيْمُونَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِ حَدِيثِ الزُّهْرِيِّ عَنِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ .
Narrated Abdullah ibn Abbas: The tradition mentioned above (No. 3833) has also been transmitted by Ibn Abbas from Maymunah, from the Prophet (ﷺ) like the tradition narrated by az-Zuhri, from Ibn al-Musayyab
स्रोत में दर्ज दर्जे
ShadhMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।