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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3652

नंबर 3652किताब 26, नंबर 12
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِسْحَاقَ الْمُقْرِئُ الْحَضْرَمِيُّ، حَدَّثَنَا سُهَيْلُ بْنُ مِهْرَانَ، - أَخُو حَزْمٍ الْقُطَعِيِّ - حَدَّثَنَا أَبُو عِمْرَانَ، عَنْ جُنْدُبٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ قَالَ فِي كِتَابِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ بِرَأْيِهِ فَأَصَابَ فَقَدْ أَخْطَأَ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Jundub: The Prophet (ﷺ) said: If anyone interprets the Book of Allah in the light of his opinion even if he is right, he has erred
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · Knowledge (Kitab Al-Ilm)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।