حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ، عَنْ لُؤْلُؤَةَ، عَنْ أَبِي صِرْمَةَ، - قَالَ أَبُو دَاوُدَ قَالَ غَيْرُ قُتَيْبَةَ فِي هَذَا الْحَدِيثِ عَنْ أَبِي صِرْمَةَ صَاحِبِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم - عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ " مَنْ ضَارَّ أَضَرَّ اللَّهُ بِهِ وَمَنْ شَاقَّ شَاقَّ اللَّهُ عَلَيْهِ " .
Narrated AbuSirmah: The Prophet (ﷺ) said: If anyone harms (others), Allah will harm him, and if anyone shows hostility to others, Allah will show hostility to him
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।