حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، بِمَعْنَى إِسْنَادِهِ أَنَّ رَجُلَيْنِ، ادَّعَيَا بَعِيرًا عَلَى عَهْدِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَبَعَثَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا شَاهِدَيْنِ فَقَسَمَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بَيْنَهُمَا نِصْفَيْنِ .
The tradition mentioned above has also been transmitted by Qatadah through a different chain of narrators to the effect that two men laid claim camel and both of them produced witness so the prophet (peace be upon him) divided it in halves between them
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।