حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ الْمَهْرِيُّ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ يُونُسَ بْنِ يَزِيدَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، - رضى الله عنه - قَالَ وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ الرَّأْىَ إِنَّمَا كَانَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مُصِيبًا لأَنَّ اللَّهَ كَانَ يُرِيهِ وَإِنَّمَا هُوَ مِنَّا الظَّنُّ وَالتَّكَلُّفُ .
Narrated Umar ibn al-Khattab: Umar said while he was (sitting) on the pulpit: O people, the opinion from the Messenger of Allah (ﷺ) was right, because Allah showed (i.e. inspired) him; but from us it is sheer conjecture and artifice
स्रोत में दर्ज दर्जे
Daif MaqtuAl-Albani
Daif MaqtuMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।