सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन अबू दाऊद

नंबर 3575

नंबर 3575किताब 25, नंबर 5
حَدَّثَنَا عَبَّاسٌ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا مُلاَزِمُ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنِي مُوسَى بْنُ نَجْدَةَ، عَنْ جَدِّهِ، يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ - وَهُوَ أَبُو كَثِيرٍ - قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ طَلَبَ قَضَاءَ الْمُسْلِمِينَ حَتَّى يَنَالَهُ ثُمَّ غَلَبَ عَدْلُهُ جَوْرَهُ فَلَهُ الْجَنَّةُ وَمَنْ غَلَبَ جَوْرُهُ عَدْلَهُ فَلَهُ النَّارُ ‏"‏ ‏.‏
Narrated AbuHurayrah: The Prophet (ﷺ) said: If anyone seeks the office of judge among Muslims till he gets it and his justice prevails over his tyranny, he will go to Paradise; but the man whose tyranny prevails over his justice will go to Hell
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Office of the Judge (Kitab Al-Aqdiyah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।