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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3552

नंबर 3552किताब 24, नंबर 137
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ أَبِي الْحَوَارِيِّ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، وَعُرْوَةَ، عَنْ جَابِرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمَعْنَاهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَهَكَذَا رَوَاهُ اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ جَابِرٍ ‏.‏
The tradition mentioned above has also been narrated by Jabir from the Prophet (ﷺ) to the same effect through a different chain of narrators. Abu Dawud said:A similar tradition has also been transmitted by al-Laith b. Sa'd from al-Zuhri, from Abu Salamah from Jabir
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Wages (Kitab Al-Ijarah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।