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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3525

नंबर 3525किताब 24, नंबर 110
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ، عَنْ حَمَّادٍ، - يَعْنِي ابْنَ زَيْدٍ - عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، يَرْفَعُ الْحَدِيثَ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ مَنْ تَرَكَ دَابَّةً بِمُهْلِكٍ فَأَحْيَاهَا رَجُلٌ فَهِيَ لِمَنْ أَحْيَاهَا ‏"‏ ‏.‏
Narrated ash-Sha'bi: The Prophet (ﷺ) said: If anyone leaves an animal at a place of perishing and another man brings it to life, it belongs to him who brings it to life
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Wages (Kitab Al-Ijarah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।