حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّهُ قَالَ حَجَمَ أَبُو طَيْبَةَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَمَرَ لَهُ بِصَاعٍ مِنْ تَمْرٍ وَأَمَرَ أَهْلَهُ أَنْ يُخَفِّفُوا عَنْهُ مِنْ خَرَاجِهِ .
Narrated Anas b. Malik :That Abu Tibah cupped the Messenger of Allah (ﷺ) and he ordered that a sa' of dates be given to him, also ordering his people to remit some of his dues
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih Bukhari (2102) Sahih Muslim (1577)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।