حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ الطَّالْقَانِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ بَيْعِ الثَّمَرِ حَتَّى يَبْدُوَ صَلاَحُهُ وَلاَ يُبَاعُ إِلاَّ بِالدِّينَارِ أَوْ بِالدِّرْهَمِ إِلاَّ الْعَرَايَا .
Narrated Jabir ibn Abdullah: The Prophet (ﷺ) forbade the sale of fruits till they were clearly in good condition , and (ordered that) they should not be sold but for dinar or dirham except Araya
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih Bukhari (2381) Sahih Muslim (1536 After 1543)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।