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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3289

नंबर 3289किताब 22, नंबर 48
حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ الأَيْلِيِّ، عَنِ الْقَاسِمِ، عَنْ عَائِشَةَ، رضى الله عنها قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏ "‏ مَنْ نَذَرَ أَنْ يُطِيعَ اللَّهَ فَلْيُطِعْهُ، وَمَنْ نَذَرَ أَنْ يَعْصِيَ اللَّهَ فَلاَ يَعْصِهِ ‏"‏ ‏.‏
Narrated 'Aishah:The Messenger of Allah (ﷺ) as saying: If anyone vows to obey Allah, let him obey Him, but if anyone vows to disobey Him, let him not disobey Him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (6696، 6700)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · Oaths and Vows (Kitab Al-Aiman Wa Al-Nudhur)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।