सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन अबू दाऊद

नंबर 3273

नंबर 3273किताब 22, नंबर 32
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ، حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَنِي أَبِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏:‏ ‏ "‏ لاَ نَذْرَ إِلاَّ فِيمَا يُبْتَغَى بِهِ وَجْهُ اللَّهِ، وَلاَ يَمِينَ فِي قَطِيعَةِ رَحِمٍ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Amr ibn al-'As: The Messenger of Allah (ﷺ) said: A vow is binding in those things by which the pleasure of Allah is sought, and an oath to break ties of relationship is not binding
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · Oaths and Vows (Kitab Al-Aiman Wa Al-Nudhur)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।