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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3262

नंबर 3262किताब 22, नंबर 21
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، وَمُسَدَّدٌ، - وَهَذَا حَدِيثُهُ - قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏ "‏ مَنْ حَلَفَ فَاسْتَثْنَى فَإِنْ شَاءَ رَجَعَ، وَإِنْ شَاءَ تَرَكَ غَيْرَ حِنْثٍ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Umar: The Prophet (ﷺ) said: If anyone swears an oath and makes an exception, he may fulfil it if he wishes and break it if he wishes without any accountability for breaking
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · Oaths and Vows (Kitab Al-Aiman Wa Al-Nudhur)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।