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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3222

नंबर 3222किताब 21, नंबर 134
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى الْبَلْخِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ عَقْرَ فِي الإِسْلاَمِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ عَبْدُ الرَّزَّاقِ كَانُوا يَعْقِرُونَ عِنْدَ الْقَبْرِ بَقَرَةً أَوْ شَاةً ‏.‏
Narrated Anas ibn Malik: The Prophet (ﷺ) said: There is no slaughtering (at the grave) in Islam. 'Abd al-Razzaq said: They used to slaughter cows or sheep at grave
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · Funerals (Kitab Al-Jana'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।