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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3213

नंबर 3213किताब 21, नंबर 125
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، ح وَحَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي الصِّدِّيقِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا وَضَعَ الْمَيِّتَ فِي الْقَبْرِ قَالَ ‏ "‏ بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى سُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ‏.‏ هَذَا لَفْظُ مُسْلِمٍ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Umar: When the Prophet (ﷺ) placed the dead in the grave, he said: In the name of Allah, and following the Sunnah of the Messenger of Allah (ﷺ). This is Muslim's version
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · Funerals (Kitab Al-Jana'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।