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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3211

नंबर 3211किताब 21, नंबर 123
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ أَوْصَى الْحَارِثُ أَنْ يُصَلِّيَ، عَلَيْهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ فَصَلَّى عَلَيْهِ ثُمَّ أَدْخَلَهُ الْقَبْرَ مِنْ قِبَلِ رِجْلَىِ الْقَبْرِ وَقَالَ هَذَا مِنَ السُّنَّةِ ‏.‏
Abu Ishaq said:Al-Harith left his will that Abdullah ibn Yazid should offer his funeral prayer; so he prayed over him. He then put him in the grave from the side of his legs and said: This is a Sunnah (model practice of the Prophet)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · Funerals (Kitab Al-Jana'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।