حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ فَارِسٍ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ، عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَاتَ إِبْرَاهِيمُ ابْنُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ ابْنُ ثَمَانِيَةَ عَشَرَ شَهْرًا فَلَمْ يُصَلِّ عَلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم .
Narrated Aisha, Ummul Mu'minin: Ibrahim, the son of the Prophet (ﷺ), died when he was eighteen months old. The Messenger of Allah (ﷺ) did not pray over him
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan IsnaadAl-Albani
Hasan IsnaadMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।