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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3106

नंबर 3106किताब 21, नंबर 18
حَدَّثَنَا الرَّبِيعُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَبُو خَالِدٍ، عَنِ الْمِنْهَالِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ عَادَ مَرِيضًا لَمْ يَحْضُرْ أَجَلُهُ فَقَالَ عِنْدَهُ سَبْعَ مِرَارٍ أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ إِلاَّ عَافَاهُ اللَّهُ مِنْ ذَلِكَ الْمَرَضِ ‏"‏ ‏.‏
अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जो किसी ऐसे रोगी का हाल जानने के लिए जाता है, जिसकी मौत का अभी समय नहीं आया है और उसके पास सात बार यह दुआ पढ़ता है : (मैं महान अल्लाह, जो महान सिंहासन का रब है, से दुआ करता हूँ कि तुमको स्वस्थ कर दे।) तो उसे अल्लाह उस रोग से मुक्ति दे ही देता है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 21 · Funerals (Kitab Al-Jana'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।