حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، حَدَّثَنَا عِمْرَانُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الشِّخِّيرِ، عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍ، قَالَ أَهْدَيْتُ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَاقَةً فَقَالَ " أَسْلَمْتَ " . فَقُلْتُ لاَ . فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " إِنِّي نُهِيتُ عَنْ زَبْدِ الْمُشْرِكِينَ " .
Narrated Iyad ibn Himar: I presented a she-camel to the Prophet (ﷺ). He asked: Have you embraced Islam? I replied: No. The Prophet (ﷺ) said: I have been prohibited to accept the present of polytheists
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan SahihAl-Albani
Hasan SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Hasan SahihShuaib Al Arnaut
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।