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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3048

नंबर 3048किताब 20, नंबर 121
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ رَجُلٍ، مِنْ بَكْرِ بْنِ وَائِلٍ عَنْ خَالِهِ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أُعَشِّرُ قَوْمِي قَالَ ‏ "‏ إِنَّمَا الْعُشُورُ عَلَى الْيَهُودِ وَالنَّصَارَى ‏"‏ ‏.‏
A man reported from Bakr bin Wa’il on the authority of his maternal uncle as saying, I said “Apostle of Allaah(ﷺ) may I levy tithe on my people.?” He replied “Tithes are to be levied on Jews and Christians.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Tribute, Spoils, and Rulership (Kitab Al-Kharaj, Wal-Fai' Wal-Imarah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।