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सुनन अबू दाऊद

नंबर 3018

नंबर 3018किताब 20, नंबर 91
حَدَّثَنَا ابْنُ السَّرْحِ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ بْنُ يَزِيدَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ بَلَغَنِي أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم افْتَتَحَ خَيْبَرَ عَنْوَةً بَعْدَ الْقِتَالِ وَنَزَلَ مَنْ نَزَلَ مِنْ أَهْلِهَا عَلَى الْجَلاَءِ بَعْدَ الْقِتَالِ ‏.‏
Ibn Shihab said “It has reached me that the Apostle of Allaah(ﷺ) conquered Khaibar by force. Its inhabitants who came down (from their fortress) for expulsion came down after fighting.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Tribute, Spoils, and Rulership (Kitab Al-Kharaj, Wal-Fai' Wal-Imarah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।