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सुनन अबू दाऊद

नंबर 991

नंबर 991किताब 2, नंबर 602
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ النُّفَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ، - يَعْنِي ابْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ - حَدَّثَنَا عِصَامُ بْنُ قُدَامَةَ، - مِنْ بَنِي بُجَيْلَةَ - عَنْ مَالِكِ بْنِ نُمَيْرٍ الْخُزَاعِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَاضِعًا ذِرَاعَهُ الْيُمْنَى عَلَى فَخِذِهِ الْيُمْنَى رَافِعًا أُصْبُعَهُ السَّبَّابَةَ قَدْ حَنَاهَا شَيْئًا ‏.‏
Narrated AbuMalik Numayr al-Khuza'i: I saw the Prophet (peace be upon him placing his right hand on his right thigh and raising his forefinger curving it a little)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।