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सुनन अबू दाऊद

नंबर 949

नंबर 949किताब 2, नंबर 560
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ، عَنِ الْحَارِثِ بْنِ شُبَيْلٍ، عَنْ أَبِي عَمْرٍو الشَّيْبَانِيِّ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ، قَالَ كَانَ أَحَدُنَا يُكَلِّمُ الرَّجُلَ إِلَى جَنْبِهِ فِي الصَّلاَةِ فَنَزَلَتْ ‏{‏ وَقُومُوا لِلَّهِ قَانِتِينَ ‏}‏ فَأُمِرْنَا بِالسُّكُوتِ وَنُهِينَا عَنِ الْكَلاَمِ ‏.‏
Zaid b. Arqam said ; One of us used to speak to the man standing by his side during prayer. Then the Quranic verse “ And stand up with devotion to Allah”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (1200) Sahih Muslim (539)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।