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सुनन अबू दाऊद

नंबर 929

नंबर 929किताब 2, नंबर 540
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، أَخْبَرَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي مَالِكٍ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ - أُرَاهُ رَفَعَهُ - قَالَ ‏ "‏ لاَ غِرَارَ فِي تَسْلِيمٍ وَلاَ صَلاَةٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَرَوَاهُ ابْنُ فُضَيْلٍ عَلَى لَفْظِ ابْنِ مَهْدِيٍّ وَلَمْ يَرْفَعْهُ ‏.‏
Abu Hurairah reported the Prophet(ﷺ) as saying :There is no loss in salutation and in prayer. Abu Dawud said: According to the version of Ibn Mahdi, this tradition has been narrated by Ibn Fudail as a statement of Abu Hurairah and not as a saying of the Prophet(ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।