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सुनन अबू दाऊद

नंबर 892

नंबर 892किताब 2, नंबर 502
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، - يَعْنِي ابْنَ إِبْرَاهِيمَ - عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، رَفَعَهُ قَالَ ‏ "‏ إِنَّ الْيَدَيْنِ تَسْجُدَانِ كَمَا يَسْجُدُ الْوَجْهُ فَإِذَا وَضَعَ أَحَدُكُمْ وَجْهَهُ فَلْيَضَعْ يَدَيْهِ وَإِذَا رَفَعَ فَلْيَرْفَعْهُمَا ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Umar: The Prophet (ﷺ) said: Both hands prostrate as the face prostrates. When one of you puts his face (on the ground) he should put his hands too (on the ground). And when he raises it, he should raise them too
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।