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सुनन अबू दाऊद

नंबर 885

नंबर 885किताब 2, नंबर 495
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ الْجُرَيْرِيُّ، عَنِ السَّعْدِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، أَوْ عَنْ عَمِّهِ، قَالَ رَمَقْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي صَلاَتِهِ فَكَانَ يَتَمَكَّنُ فِي رُكُوعِهِ وَسُجُودِهِ قَدْرَ مَا يَقُولُ ‏ "‏ سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ ‏"‏ ‏.‏ ثَلاَثًا ‏.‏
Sa’d reported that he heard his father or his uncle say ; I witnessed the Prophet (ﷺ) while offering prayer. He used to stay in his bowing and his prostration as long as one uttera the words “Glory be to Allah and praise be to Him” three times
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।