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सुनन अबू दाऊद

नंबर 873

नंबर 873किताब 2, नंबर 483
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ صَالِحٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ قَيْسٍ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ حُمَيْدٍ، عَنْ عَوْفِ بْنِ مَالِكٍ الأَشْجَعِيِّ، قَالَ قُمْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَيْلَةً فَقَامَ فَقَرَأَ سُورَةَ الْبَقَرَةِ لاَ يَمُرُّ بِآيَةِ رَحْمَةٍ إِلاَّ وَقَفَ فَسَأَلَ وَلاَ يَمُرُّ بِآيَةِ عَذَابٍ إِلاَّ وَقَفَ فَتَعَوَّذَ - قَالَ - ثُمَّ رَكَعَ بِقَدْرِ قِيَامِهِ يَقُولُ فِي رُكُوعِهِ ‏ "‏ سُبْحَانَ ذِي الْجَبَرُوتِ وَالْمَلَكُوتِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْعَظَمَةِ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ سَجَدَ بِقَدْرِ قِيَامِهِ ثُمَّ قَالَ فِي سُجُودِهِ مِثْلَ ذَلِكَ - ثُمَّ قَامَ فَقَرَأَ بِآلِ عِمْرَانَ ثُمَّ قَرَأَ سُورَةً سُورَةً ‏.‏
औफ़ बिन मालिक अशजई (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक रात तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप खड़े हुए और सूरा बक़रा पढ़ी। जब रहमत की आयत से गुज़रते, तो रुककर (अल्लाह से उसकी दया) माँगते और जब अज़ाब की आयत से गुज़रते, तो रुककर (उससे अल्लाह की) शरण माँगते। वह कहते हैं : आप जितनी देर खड़े रहे, उतनी ही देर रुकू में भी रहे। रुकू में कह रहे थे : “सुबहाना ज़िल-जबरूति वल-मलकूति वल-किबरियाइ वल-अज़मति।” फिर आपने क़याम के बराबर ही सजदा किया और सजदे में भी वही दुआ पढ़ी। फिर खड़े हुए और सूरा आले इमरान पढ़ी। फिर एक-एक सूरा पढ़ी।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।