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सुनन अबू दाऊद

नंबर 866

नंबर 866किताब 2, नंबर 476
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ، عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى، عَنْ تَمِيمٍ الدَّارِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِهَذَا الْمَعْنَى قَالَ ‏ "‏ ثُمَّ الزَّكَاةُ مِثْلُ ذَلِكَ ثُمَّ تُؤْخَذُ الأَعْمَالُ عَلَى حَسَبِ ذَلِكَ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Tamim ad-Dari: Tamim reported this tradition from the Prophet (ﷺ) as (Hadith No 863). This version adds: Then zakat will be considered in a similar way. Then all the actions will be considered accordingly
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।