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सुनन अबू दाऊद

नंबर 844

नंबर 844किताब 2, नंबर 454
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ خَالِدٍ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ، أَنَّهُ رَأَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم إِذَا كَانَ فِي وِتْرٍ مِنْ صَلاَتِهِ لَمْ يَنْهَضْ حَتَّى يَسْتَوِيَ قَاعِدًا ‏.‏
Abu Qilabah said:Malik b. al-Huwairith saw that the prophet (may peace by upon him) would not stand at the end of the first or the third rak’ah until he sat down straight
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (823)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।