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सुनन अबू दाऊद

नंबर 833

नंबर 833किताब 2, नंबर 443
حَدَّثَنَا أَبُو تَوْبَةَ الرَّبِيعُ بْنُ نَافِعٍ، أَخْبَرَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، - يَعْنِي الْفَزَارِيَّ - عَنْ حُمَيْدٍ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي التَّطَوُّعَ نَدْعُو قِيَامًا وَقُعُودًا وَنُسَبِّحُ رُكُوعًا وَسُجُودًا ‏.‏
Jabir b. ‘Abd Allah said:we used to offer supererogatory prayers and recite supplications while we were standing, and would glorify Allah while bowing and prostrating
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif MuqufAl-Albani
  • Daif MuqufMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।