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सुनन अबू दाऊद

नंबर 788

नंबर 788किताब 2, नंबर 398
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَأَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ الْمَرْوَزِيُّ، وَابْنُ السَّرْحِ، قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، - قَالَ قُتَيْبَةُ فِيهِ - عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم لاَ يَعْرِفُ فَصْلَ السُّورَةِ حَتَّى تُنَزَّلَ عَلَيْهِ ‏{‏ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ ‏}‏ ‏.‏ وَهَذَا لَفْظُ ابْنِ السَّرْحِ ‏.‏
Ibn Abbas said:The prophet (ﷺ) did not distinguish between the two surahs until the words “In the name of Allah, the Compassionate, the merciful” was revealed to him. These are the words of Ibn al-sarh
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।