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सुनन अबू दाऊद

नंबर 775

नंबर 775किताब 2, नंबर 385
حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلاَمِ بْنُ مُطَهَّرٍ، حَدَّثَنَا جَعْفَرٌ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَلِيٍّ الرِّفَاعِيِّ، عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ النَّاجِيِّ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا قَامَ مِنَ اللَّيْلِ كَبَّرَ ثُمَّ يَقُولُ ‏"‏ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ وَتَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلاَ إِلَهَ غَيْرُكَ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ يَقُولُ ‏"‏ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ ‏"‏ ‏.‏ ثَلاَثًا ثُمَّ يَقُولُ ‏"‏ اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا ‏"‏ ‏.‏ ثَلاَثًا ‏"‏ أَعُوذُ بِاللَّهِ السَّمِيعِ الْعَلِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ مِنْ هَمْزِهِ وَنَفْخِهِ وَنَفْثِهِ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ يَقْرَأُ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ وَهَذَا الْحَدِيثُ يَقُولُونَ هُوَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَلِيٍّ عَنِ الْحَسَنِ مُرْسَلاً الْوَهَمُ مِنْ جَعْفَرٍ ‏.‏
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब रात में उठते, तो तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहते, फिर यह दुआ पढ़ते : "سبحانك اللهم وبحمدك وتبارك اسمك، وتعالى جدك، ولا إله غيرك" (ऐ अल्लाह, तू पवित्र है अपनी प्रशंसा समेत, तेरा नाम बड़ी बरकत वाला है, तेरी शान बड़ी बुलंद है और तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं।) ऐसा तीन बार कहते। फिर तीन बार «لا إله إلا الله» (तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं।) कहते। फिर तीन बार «الله أكبر كبيرا» (अल्लाह सबसे बड़ा और बहुत बड़ा है।) कहते। फिर यह दुआ पढ़ते : «أعُوذُ بالله السَّميع العليم من الشَّيطان الرَّجيم من هَمْزِه، ونَفْخِه، ونَفْثِه» (ऐ अल्लाह, मैं धुतकारे हुए शैतान से तेरी शरण चाहता हूँ उसके जुनून से, उसके अहंकार पर उभारने से और उसके जादू से।) फिर क़ुरआन पढ़ते।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।