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सुनन अबू दाऊद

नंबर 768

नंबर 768किताब 2, नंबर 378
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا أَبُو نُوحٍ، قُرَادٌ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ، بِإِسْنَادِهِ بِلاَ إِخْبَارٍ وَمَعْنَاهُ قَالَ كَانَ إِذَا قَامَ بِاللَّيْلِ كَبَّرَ وَيَقُولُ ‏.‏
The above mentioned tradition has been reported by ‘Ikramah with a different chain of narrators. This version adds:When he stood up, he said the takbir (Allah is most great) and said
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।