सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन अबू दाऊद

नंबर 756

नंबर 756किताब 2, नंबर 366
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَحْبُوبٍ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ زِيَادِ بْنِ زَيْدٍ، عَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ، أَنَّ عَلِيًّا، - رضى الله عنه - قَالَ السُّنَّةُ وَضْعُ الْكَفِّ عَلَى الْكَفِّ فِي الصَّلاَةِ تَحْتَ السُّرَّةِ ‏.‏
Narrated Ali ibn AbuTalib: AbuJuhayfah said: Ali said that it is a sunnah to place one hand on the other in prayer below the navel
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।