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सुनन अबू दाऊद

नंबर 745

नंबर 745किताब 2, नंबर 355
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ نَصْرِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَرْفَعُ يَدَيْهِ إِذَا كَبَّرَ وَإِذَا رَكَعَ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنَ الرُّكُوعِ حَتَّى يَبْلُغَ بِهِمَا فُرُوعَ أُذُنَيْهِ ‏.‏
Malik b. al-Huwairith said:I saw the Prophet (ﷺ) raise his hands when he uttered the takbir (Allah is most great), when he bowed and when he raised his head after bowing until he brought them to the lobes of his ears
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih Muslim (391)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।