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सुनन अबू दाऊद

नंबर 729

नंबर 729किताब 2, नंबर 339
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الأَنْبَارِيُّ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ شَرِيكٍ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ كُلَيْبٍ، عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ وَائِلٍ، عَنْ وَائِلِ بْنِ حُجْرٍ، قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي الشِّتَاءِ فَرَأَيْتُ أَصْحَابَهُ يَرْفَعُونَ أَيْدِيَهُمْ فِي ثِيَابِهِمْ فِي الصَّلاَةِ ‏.‏
Wa’il b. Hujr said:I came to the Prophet(ﷺ) during winter; I saw his companions raise their hands in their clothes in prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।