حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَوْنِ بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم صَلَّى بِهِمْ بِالْبَطْحَاءِ وَبَيْنَ يَدَيْهِ عَنَزَةٌ الظُّهْرَ رَكْعَتَيْنِ وَالْعَصْرَ رَكْعَتَيْنِ يَمُرُّ خَلْفَ الْعَنَزَةِ الْمَرْأَةُ وَالْحِمَارُ .
Abu Juhaifah said:The Prophet (ﷺ) led them in prayer at al-Batha', with a staff set up in front of him. (He prayed) two rak'ahs of the Zuhr prayer and two rak'ahs of the 'Asr prayer. The women and the donkeys would pass in front of the staff
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih Bukhari (495) Sahih Muslim (503)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।