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सुनन अबू दाऊद

नंबर 660

नंबर 660किताब 2, नंबर 270
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا بِشْرٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْمُفَضَّلِ - حَدَّثَنَا غَالِبٌ الْقَطَّانُ، عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي شِدَّةِ الْحَرِّ فَإِذَا لَمْ يَسْتَطِعْ أَحَدُنَا أَنْ يُمَكِّنَ وَجْهَهُ مِنَ الأَرْضِ بَسَطَ ثَوْبَهُ فَسَجَدَ عَلَيْهِ ‏.‏
Anas b. Malik said:we used to pray along with the Messenger of Allah (ﷺ) in intense heat. When any of us could not rest his face on bare ground while prostrating due to intense heat he spread his cloth and would prostrate on it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (385) Sahih Muslim (620)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।