حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ، عَنِ الشَّيْبَانِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ، حَدَّثَتْنِي مَيْمُونَةُ بِنْتُ الْحَارِثِ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي وَأَنَا حِذَاءَهُ وَأَنَا حَائِضٌ وَرُبَّمَا أَصَابَنِي ثَوْبُهُ إِذَا سَجَدَ وَكَانَ يُصَلِّي عَلَى الْخُمْرَةِ .
Maimunah bint al-Harith reported :the Messenger of Allah (ﷺ) used to pray while. I was by his side in the state of menstruation. Sometime his cloth would touch me when he prostrated. He would pray on a small mat
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih Bukhari (379) Sahih Muslim (513)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।