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सुनन अबू दाऊद

नंबर 606

नंबर 606किताब 2, नंबर 216
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَيَزِيدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ مَوْهَبٍ، - الْمَعْنَى - أَنَّ اللَّيْثَ، حَدَّثَهُمْ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ اشْتَكَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَصَلَّيْنَا وَرَاءَهُ وَهُوَ قَاعِدٌ وَأَبُو بَكْرٍ يُكَبِّرُ لِيُسْمِعَ النَّاسَ تَكْبِيرَهُ ثُمَّ سَاقَ الْحَدِيثَ ‏.‏
Jabir said :when the prophet (ﷺ) became seriously ill, we prayed behind him while he was sitting and Abu Bakr was calling “Allah is most great “ to cause the people to hear the TAKBIR. Then he (the narrators) narrated the rest of the tradition
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (413)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।